अयोध्या के धाम बसते हैं श्रीराम
अयोध्या के धाम बसते हैं श्रीराम
गूजे कण-कण में सियाराम का नाम
अयोध्या के धाम बसते हैं श्रीराम
जो भी यहां पर आए खाली हाथ न जाए
मैं खड़ी हूं द्वारे तेरे निज आंचल फैलाए
हमको तुझसे मिलता जीने का आधार
अयोध्या के धाम बसते हैं श्रीराम
ना वैभव चाहे हम ना दौलत के रंग
मिलती रहे खुशियां सियाराम के संग
चाहत मेरी साथ ना छूटे चाहे छूटे संसार
अयोध्या के धाम बसते हैं मेरे श्रीराम
धनुर्धारी राम तेरे अनेको हजारों रूप
हे त्रिपुरारी तू जब चाहे करदे छाव धूप
आजपुकारे ये पुजारिन सुनलो मेरीपुकार
अयोध्या के धाम बसते हैं मेरे श्रीराम
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