मन नेकी करले दो दिन का मेहमान
मन नेकी करले दो दिन का मेहमान
दो दिन का मेहमान दो दिन का मेहमान
मन नेकी करले दो दिन का मेहमान
जोरु लड़का कुटुंब कबीला
दो दिन का तन मन का मेला
अंत काल हंस जाए अकेला
तज माया जंजाल माया जंजाल
मन नेकी करले दो दिन का मेहमान
कहां से आया तू कहां जाएगा
तन छूट मन कहां समाएगा
आखिर तुझको कौन कहेगा
गुरु बिना आत्मज्ञान आत्मज्ञान
मन नेकी करले दो दिन का मेहमान
कौन तुम्हारा सच्चा साईं
झूठी है यह जग हंसनाई
कौन ठिकाना है तेरा भाई
क्या बस्ती क्या नाम क्या नाम
मन नेकी करले दो दिन का मेहमान
रहत माल खूब जो भरता
आवत जावत वो रीता
युगों युगों से मरता जीता
क्यों करता अभिमान अभिमान
मन नेकी करले दो दिन का मेहमान
लख चौरासी भोगे ताशा
ऊंच नीच घर लेता बाशा
कहत कबीर सुनो भाई साधो
लेले गुरु का नाम गुरु का नाम
मन नेकी करले दो दिन का मेहमान
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