आयेगा जब रे बुलावा हरी का
आयेगा जब रे बुलावा हरी का
छोड़कर सब कुछ जाना पड़ेगा
आयेगा जब रे बुलावा हरी का
राग द्वेष में हरि बिसरायो
भूल के निज को जनम गवायो
नाम हरी का इक साथ जायेगा
और तू कुछ ना ले पायेगा
आयेगा जब रे बुलावा हरी का
छोड़कर सब कुछ जाना पड़ेगा
सुमिरन की सांची कमाई
झूठी जग की सब है सगाई
भज ले हरि को तू आठो याम
मिट जाएंगे तेरे कष्ट तमाम
आएगा जब रे बुलावा हरी का
छोड़कर सब कुछ जाना पड़ेगा
अरजी कर तू हरि से ऐसी
भक्ति मिले मीरा की जैसी
हाथ तेरे जीवन की बाजी
भक्ती से करले तू हरि को राजी
आएगा जब रे बुलावा हरी का
छोड़कर सबकुछ जाना पड़ेगा
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