मनवा रे तू बड़ा नादान
मनवा रे तू बड़ा नादान
वक्त गुजारा हम हम करके
नहीं गाया कभी हरी गान
मनवा रे तू बड़ा नादान
बात-बात पर अकड़ दिखाया
अपने आप को सबल बताया
तू करता रहा अभिमान
मनवा रे तू बड़ा नादान
झूठ सांच बोल धन कमाया
दुष्कर्मों में धन को गंवाया
किया न कभी कुछ भी दान
मनवा रे तू बड़ा नादान
अब तो तू कुछ धर्म कमाले
दुष्कर्मों से मन को हटाले
धर ले हरि का ध्यान
मनवा रे तू बड़ा नादान
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