असुर निकंदन भय भंजन कुछ आन करो
असुर निकंदन भय भंजन कुछ आन करो
पवन तनय संकट मोचन कल्याण करो
असुर निकंदन भय भंजन कुछ आन करो
ग्यारहवें रुद्र तुम हो लेकर अवतारी
ज्ञानियों में आप ज्ञानी योद्धा बलशाली
बाल अवस्था में चंचल आप का था मन
सूर्य को निगल गए नटखट बड़ा बचपन
मैं हूं निर्बल बल बुद्धि का दान करो
पवन तनय संकट मोचन कल्याण करो
हे बजरंगी अब दया की कीजिए दृष्टि
गा रही महिमा तुम्हारी यह सारी सृष्टि
आपकी कृपा हो जिसपे राम मिले उसको
बेधड़क आया हूं मैं अब और कहूं किसको
दया की दृष्टि तुम मुझ पर बलवान करो
पवन तनय संकट मोचन कल्याण करो
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