एक हरी को छोड़ किसी की

by - January 18, 2020

एक हरी को छोड़ किसी की
चलती नहीं है यहां मनमानी
एक हरी को छोड़ किसी की

लंकापति रावण योद्धा ने
सीता जी का हरण किया
एक लाख पूत सवा लख नाती
खोकर कुल का नाश किया
धन भरी वह सोने की लंका
हो गई पल में कुल धानी
एक हरी को छोड़ किसी की...

मथुरा के उस कंस राजा ने
बहन देवकी को त्रास दिया
सारे पुत्र मार दिए उसने
तब प्रभु ने अवतार लिया
मार गिराया उस पापी को
था मथुरा में वह बलशाली
एक हरी को छोड़ किसी की.....

भस्मासुर ने करी तपस्या
और शंकर से वरदान लिया
शंकरजी ने खुश होकर उसे
शक्ति का वरदान दिया
भस्म चला करने शंकर को
शंकर भागे हैं हरी दानी
एक हरी को छोड़ किसी की....

उसे मारने को श्रीहरि ने
सुंदरी का रूप लिया
जैसा जैसा नाचे मोहन
वैसा वैसा उसने नाच किया
अपने हाथ को सरपे रख कर
भस्म हुआ वह अभिमानी
एक हरी को छोड़ किसी की
चलती नहीं है यहां मनमानी


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