मनको की यह माला नहीं मेरे काम की
मनको की यह माला नहीं मेरे काम की
इसमें कहीं भी सूरत नहीं मेरे राम की
मनको की यह माला नहीं मेरे काम की
मैं हूं राम का दीवाना जाने ये सब जमाना
करने को सेवा प्रभु की सांसें मुझे मिली
मनको की यह माला नहीं मेरे काम की
इसमें कहीं भी सूरत नहीं मेरे राम की
जाकर बजादूं डंका पल में जला दूं लंका
सियाराम बसते मन में रोमरोम तन मन में
मनको की यह माला नहीं मेर काम की
इसमें कहीं भी सूरत नहीं मेरे राम की
फिर मुख ना कोई खोले श्रीराम उठ बोले
भक्त हनुमान का श्रीराम ने किया सम्मान
मनको की यह माला नहीं मेरे काम की
इसमें कहीं भी सूरत नहीं मेरे राम की
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