आरती जग जननी मैं तेरी गाऊं
आरती जग जननी मैं तेरी गाऊं
तुम बिन कौन सुने मेरी माता
किसको जाकर बिनय सुनाऊं
आरती जग जननी मैं तेरी गाऊं
असुरों ने देवों को सताया
तुमने रूप धरा महामाया
उसी रुप में मैं दरशन चाहूं
आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं
रक्त बीज मधु कैटभ मारे
अपने भक्तों के काज संवारे
मैं भी तेरा दास कहलाऊं
आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं
.
आरती करुं तेरी बरदाती
ह्रदय का दीपक नैनो की बाती
निशदिन प्रेम की ज्योत जगाऊं
आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं
ध्यानू भक्त तुम्हारा यश गाया
जिसने ध्याया माता फल पाया
मैं भी दर तेरे शीश झुकाऊं
मैया चरण कमल रज चाहूँ
आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं
0 comments