विश्वनाथ तेरी महिमा जब तीन लोक गाए
विश्वनाथ तेरी महिमा जब तीन लोक गाए
नाचे धरा गगन और झूमे दसों दिशाएं
विश्वनाथ तेरी महिमा जब तीन लोक गाए
तू देव सबसे न्यारा तुमको नमन हमारा
लाए हैं तेरे द्वारे दरशन की कामनाएं
विश्वनाथ तेरी महिमा पंछी पवन सुनाएं
नाचे धरा गगन और झूमे दसों दिशाएं
मस्तक पर चंद्र आधा है रूप तेरा सादा
आयी है गंग धारा लेकर तेरी जटाएं
विश्वनाथ तेरी महिमा तारे गगन के गाए
नाचे धरा गगन और झूमे दसों दिशाएं
है प्रेम की सुधा भी है रूपचंद्र का भी
हो नीलकंठ वाले कैसे तुझे रिझाएं
विश्वनाथ तेरी महिमा संसार सारा गाए
नाचे धरा गगन और झूमे दसों दिशाएं
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